गुरुत्वाकर्षण
गुरुत्वाकर्षण एक वस्तु या पदार्थ द्वारा एक दूसरे को आकृति करने की प्रवर्ति को करते है | सर्वप्रथम गुरुत्वाकर्षण को न्युटन द्वारा प्रतिपादित किया | न्यूटन के सिद्धांत को बाद में अल्वर्ट आंस्टीन ने सापेक्षता सिद्धांत से बदला गया | इससे पहले वरहा मिहिर ने कहा था की किसी प्रकार की शक्ति वस्तुओं को आपस में आकर्षित करती या चिपकाती है
गुरुत्वाकर्षण का इतिहास
17 वीं शताब्दी की शुरुआत में गैलिलिओ द्वारा इस पर सर्वप्रथम कार्य किया गया | पहले प्रयासों मे पीसा के टॉवर से गेंदों को छोड़ने का प्रयोग किया गया इसके बाद गेंदों के माप के साथ इन्क़लियन को घुमाया गया | जिसमे दिखाया कि गुरुत्वाकर्षण त्वरण सभी वस्तुओं के एक सामान है | गैलीलियो ने हवा के प्रतिरोध को मे बताया कि कम द्रव्यमान वाली वस्तुए वातावरण में मंद गति से गिर सकती है |
गुरुत्वाकर्षण का नियम
न्युटन ने अपनी खोज के आधार पर बताया कि केवल पृथ्वी ही नही विश्व की प्रत्येक वस्तु एवं दूसरे कण एक दूसरे को भी आकर्षित करते है | दो कणो के बीच कार्य करने वाला आकर्षण बल उन कणों की संहतियों के गुणनफल का समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग का व्युत्क्रमानुपाती होता है | कणों के बीच कार्य करने वाली आकर्षण को गुरुत्वाकर्षण तथा उनके बीच उत्पन्न होने वाले बल को गुरुत्वाकर्षण बल कहते है | न्युटन द्वारा प्रतिपादित किये इस नियम को न्युटनको गुरुत्वाकर्षण नियम कहते है तथा इसे गुरुत्वाकर्षण का प्रतिलोम वर्ग नियम भी कहा जाता है |
न्युटन ने अपनी खोज के आधार पर बताया कि केवल पृथ्वी ही नही विश्व की प्रत्येक वस्तु एवं दूसरे कण एक दूसरे को भी आकर्षित करते है | दो कणो के बीच कार्य करने वाला आकर्षण बल उन कणों की संहतियों के गुणनफल का समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग का व्युत्क्रमानुपाती होता है | कणों के बीच कार्य करने वाली आकर्षण को गुरुत्वाकर्षण तथा उनके बीच उत्पन्न होने वाले बल को गुरुत्वाकर्षण बल कहते है | न्युटन द्वारा प्रतिपादित किये इस नियम को न्युटनको गुरुत्वाकर्षण नियम कहते है तथा इसे गुरुत्वाकर्षण का प्रतिलोम वर्ग नियम भी कहा जाता है |
उपर्युक्त नियम को इस प्रकार व्यक्त किया गया है : मान लिया m1 और संहति वाले m2 दो पिंड परस्पर d दूरी पर स्थित है, उनके बीच कार्य करने वाले बल f का संबंध होगा |
F = G m1m2/d2 -------(1)
यहाँG एक समानुपाती नियतांक है जिसका मान सभी पदार्थो के लिए एक जैसा है इसे गुरुत्व नियतांक कहते है | इस नियतांक की विमा d है | और आंकिक मान प्रयुक्त इकाई पर निर्भर करता है | इस सूत्र के द्वारा किसी पिंड पर पृथ्वी द्वारा लगने वाले आकर्षण बल की गणना की जा सकती सकती है |
गैलीलियो द्वारा कोई भी वस्तु ऊपर से गिराने पर सीधी पृथ्वी की ओर गिरती है | ऐसा प्रतीत होता है मानो कोई अज्ञात शक्ति उसे पृथ्वी की और खींच रही हो | इटली के वैज्ञानिक गेलीलिओ ने सर्व प्रथम इस तथ्य पर प्रकाश डाला था कि जब कोई पिंड ऊपर से पृथ्वी की ओर गिरता है तो वह एक नियम त्वरिण से पृथ्वी की ओर आता है | त्वरण का यह मान सभी वस्तुओं के लिए एक सामान होता है | इस निष्कर्ष की पुष्टि उसने अपने प्रयोग और गणितीय विवेचनाओं द्वारा की है |
केप्लर के नियम
प्रथम नियम : (कक्षाओं का नियम)- सभी ग्रह सूर्य के चारो ओर दीर्घवृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगते है | तथा सूर्य उन कक्षाओ के फोकस पर होता है |
द्तीय नियम : किसी भी ग्रह को सूर्य से मिलने वाली रेखा सामान समय में समान क्षेत्रफल पार करती है | तथा सूर्य उन कक्षाओं के फोकस पर होता है |
तृतीय नियम : (परिक्रमण काल का नियम) - प्रत्येक ग्रह का सूर्य का परिक्रमण काल का वर्ग उसकी दीर्घ वृत्ताकार कक्षा की अर्ध -दीर्घ अक्ष की तृतीया घात के समानुपाती होता है |
भाष्कराचार्य का गुरुत्वाकर्षण नियम
लीलीवती ने शताब्दियों पूर्व यह प्रश्न अपने पिता भाष्कराचार्य से पूछा था | "पिताजी, यह पृथ्वी, जिस पैर हम निवास करते है, किस पर टिकी हुई है?" जिसका कुछ लोगो से जबाब मिलता है यह पृथ्वी शेषनाग, कछुआ, सूअर या हाथी पर टिकी है | इस प्रकार के तथ्य हिन्दू धर्म में दिए जाते है जो की गलत और अंध विश्वास से पूर्णतः भरे हुये है | अब सबाल ये बनता है कि वो जिस पर पृथ्वी टिकी है वो वस्तु किस पर टिकी है | इस प्रकार ये क्रम चलता रहेगा और न्याय शास्त्र में इसे अवस्था दोष कहते है |
लीलवती ने कहा फिर भी यह प्रश्न बना रहता है पिताजी कि पृथ्वी किस चीज पर टिकी है?
तब भाष्कराचार्य ने कहा, क्यों न हम ये मने कि पृथ्वी किसी भी वस्तु पर आधारित नहीं है | यदि हम कहें कि पृथ्वी अपने ही बल से टिकी है और इसे गुरुत्वाकर्षण शक्ति कह दें तो क्या गलत है?
इस पर लीलावती ने फिर पूछा यह कैसे संभव है | तब भाष्कराचार्य सिद्धांत की बात कहते है कि वस्तुओं की शक्ति बड़ी विचित्र है |
मरच्यालो भुरचला स्वभवतो यतो
विचित्रतावत्वस्तु शवत्या | | ---- शिद्धान्तशिरोमणि,गोलाध्याय - भुवनकोश
आगे कहते है -
आकृष्टिशक्तिश्च महि तया यत खस्थं
गुरुस्वभिमुखं स्वशतत्या |
आकृत्यते तत्पततीव भांति
समेसमन्तात वव पतत्वियं खे | | ---- शिद्धान्तशिरोमणि गोलाध्याय - भुवनकोश
अथार्थ पृथ्वी में आकर्षण शक्ति है | पृथ्वी अपनी आकर्षण शक्ति से भारी पदार्थो को अपनी ओर खींचती है और आकर्षण के कारन वह जमीन पर गिरते है | पर जब आकाश में सामान ताकत चारो और से लगे, तो कोई कैसे गिरे? अर्थात आकाश में ग्रह निरवलम्ब रहते हैं क्योंकि विविध ग्रहों की गुरुत्व शक्तियां सन्तुलन बनाये रखती है |
लीलवती ने कहा फिर भी यह प्रश्न बना रहता है पिताजी कि पृथ्वी किस चीज पर टिकी है?
तब भाष्कराचार्य ने कहा, क्यों न हम ये मने कि पृथ्वी किसी भी वस्तु पर आधारित नहीं है | यदि हम कहें कि पृथ्वी अपने ही बल से टिकी है और इसे गुरुत्वाकर्षण शक्ति कह दें तो क्या गलत है?
इस पर लीलावती ने फिर पूछा यह कैसे संभव है | तब भाष्कराचार्य सिद्धांत की बात कहते है कि वस्तुओं की शक्ति बड़ी विचित्र है |
मरच्यालो भुरचला स्वभवतो यतो
विचित्रतावत्वस्तु शवत्या | | ---- शिद्धान्तशिरोमणि,गोलाध्याय - भुवनकोश
आगे कहते है -
आकृष्टिशक्तिश्च महि तया यत खस्थं
गुरुस्वभिमुखं स्वशतत्या |
आकृत्यते तत्पततीव भांति
समेसमन्तात वव पतत्वियं खे | | ---- शिद्धान्तशिरोमणि गोलाध्याय - भुवनकोश
अथार्थ पृथ्वी में आकर्षण शक्ति है | पृथ्वी अपनी आकर्षण शक्ति से भारी पदार्थो को अपनी ओर खींचती है और आकर्षण के कारन वह जमीन पर गिरते है | पर जब आकाश में सामान ताकत चारो और से लगे, तो कोई कैसे गिरे? अर्थात आकाश में ग्रह निरवलम्ब रहते हैं क्योंकि विविध ग्रहों की गुरुत्व शक्तियां सन्तुलन बनाये रखती है |


