भारतीय संविधान भारत का एक सर्वोच्च विधान है जिसे 26 नवम्बर 1949 को पारित किया गया था और 26 जनवरी 1950 को प्रभाव में आया। इस दिन को भारतीय संविधान के रूप (गणतंत्र दिवस के रूप) में मनाया जाता है। भारत का संविधान विश्व के सभी गणतांत्रिक देश का सबसे लम्बा लिखित संविधान है। जिसको डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा लिखा गए था जो संविधान की ड्राफ्ट कमेटी के अध्यक्ष भी थे।
![]() |
| भारतीय संविधान |
संविधान की पहली सभा 1946 को बुलाई गई थी। भारतीय संविधान की सभा में 299 सदस्य थे जिसके अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद थे। भारतीय संविधान को तैयार करने में 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन का समय लगा।
![]() |
| डॉ भीमराव आंबेडकर संविधान को डॉ राजेंद्र प्रसाद को सौपतें हुए। |
संक्षिप्त परिचय
भारतीय संविधान के निर्माण के समय मूल संविधान में 395 अनुच्छेद जो 22 भागो में विभाजित थे इसमें केवल 8 अनुसूचियाँ थी। वर्तमान में केवल 395 अनुच्छेद, और 12 अनुसूचियाँ है संविधान में संसदीय स्वरुप की स्थापना की गई है। भारत के संविधान की धारा 79 के अनुसार, केन्द्रीय सदन की परिषद में राष्ट्रपति तथा दो सदन है। जिन्हे राज्यों की परिषद् राज्यसभा तथा लोगो का सदन लोकसभा के नाम से जाना जाता है। संविधान की धारा 74 (1) में यह व्यवस्था की गई कि राष्ट्रपति की सहायता करने तथा उसे परामर्श देने के लिए एक रूप होगा जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा और राष्ट्रपति इस मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार अपने कार्यों का निष्पादन करेगा। वास्तविक कार्यकरी शक्ति मंत्रिपरिषद में निहित है जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री है। मंत्री परिषद् सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है। प्रत्येक राज्य में एक विधानसभा होती है। कुछ राज्यों में इसके ऊपर भी एक सदन है जिसे विधानपरिषद कहा जाता है, जिसमे उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आँध्रप्रदेश और तेलंगाना है। राज्यपाल प्रत्येक राज्य में प्रमुख होता है। राज्य की कार्यकारी शक्ति राज्यपाल के निहित होती है। राज्य में में भी एक मंत्रिपरिषद होता है जिसका प्रमुख मुख्यमंत्री होता है। जो राज्यपाल को उसके कार्यकारी कार्यो के निष्पादन में सलाह देती है। केंद्रीय प्रशासित भू-भागों को संघराज्य क्षेत्र कहा जाता है। संविधान की सातवीं अनुसूची में संसद और राज्य विधायिकाओं के बीच विधायी शक्तियों का वितरण किया गया है।
संविधान का इतिहास
आजादी से पहले ही ब्रिटिश सरकार ने 1945 में भारत सम्बन्धी अपनी नई नीति की घोषणा की और 3 मंत्रीओ का कबिनेट मिशन भारत की संविधान सभा के निर्माण के लिए भारत भेजा। 15 अगस्त 1947 को भारत की आजादी के बाद संविधान सभा की घोषणा हुई और 9 दिसम्बर 1949 से अपना कार्य आरम्भ कर दिया। संविधान सभा के सदस्य भारत के राज्यों की सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा चुने गए थे। जवाहरलाल नेहरू, डॉ भीमराव अम्बेडकर, डॉ राजेंद्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे। संविधान सभा ने कुल 12 अधिवेशन किये तथा अंतिम दिन 274 सदस्यों ने इस पर हस्ताक्षर किये और संविधान बनने में 166 दिनों बैठक की जिसमे प्रेस और जनता को भाग लेने की अनुमति थी। सभी संविधान सभा के 389 सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और 26 नवंबर 1949 को इसे पारित किया और 26 जनवरी 1950 को संविधान को लागू कर दिया गया। भारतीय संविधान में सबसे प्रभावी भारत शासन अधिनियम 1935 का है।
![]() |
| पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा भारतीय संविधान पर हस्ताक्षर करते हुए। |
संविधान की प्रस्तावना
किसी भी उद्देश्य को पूरा करने से पहले उसकी प्रस्तावना प्रस्तुत की जाती है, संविधान के उद्देश्यों को प्रकट करने के लिये संविधान की प्रस्तावना प्रस्तुत की गई है। भारतीय संविधान की प्रस्तावना विश्व मे सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। भारतीय संविधान का सार, उपेक्षायें, उद्देश्य, उसका लक्ष्य और दर्शन प्रकट करता है। संविधान सभी शक्तियाँ जनता से प्राप्त करता है। 13 दिसम्बर 1946 को जवाहर लाल नेहरू द्वारा संविधान की प्रस्तावना प्रस्तुत की गई। 42 वे संविधान संशोधन 1976 द्वारा भारतीय संविधान प्रस्तावना मे समाजवाद, पंथनिरपेक्ष, धर्मनिरपेक्ष और अखण्डता शब्दो को जोड़ा गया।
संविधान की प्रस्तावना इस प्रकार हैः-
हम भारत के लोग, भारत को एक प्रबुत्व सम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिये तथा उसके समस्त नागरिकों कोः
सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतन्त्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिये तथा उन सबमे व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंण्डता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिये दृढ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा मे आज तारीख 26 नबम्बर 1949 को एतदद्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते है।
संविधान भाग 3 और 4
ये दोनों भाग "संविधान की आत्मा और चेतना " कहलाते है। स्वतंत्र राष्ट्र के लिए उसके मौलिक अधिकार और निति-निर्देश देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है निति निर्देश तत्व सर्व प्रथम आयरलैंड के संविधान में लागू किये गए थे जो जनतांत्रिक संवैधानिक विकास के नवीनतम तत्व है। ये वो तत्व है जो संविधान के विकास के साथ ही विकसित हुए है, इन तत्वों का कार्य एक जनकल्याणकारी देश की स्थापना करना है। भारतीय संविधान के इस हिस्से में निति निर्देशक तत्व और मौलिक अधिकार में भेद बताया गया है तथा निति निदेशक तत्वों के महत्व क बताया गया है।
भाग 4 "क" : मूल कर्तव्य
42 वे संविधान संशोधन में मूलकर्त्तव्य (10) जोड़ा गये तथा संविधान के भाग 4(क) के अनुच्छेद 51 - अ में रखा गया। इस समय ये 11 है 11 वां मूल कर्तव्य 76 वें संविधान संशोधन में जोड़ा गया।
51(क) मूल कर्त्तव्य
- (क) संविधान का पालन करे और उस के आदर्शों, संस्थओं, राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान का आदर करे
- (ख) स्वतंत्रा के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को ह्रदय में संजोए रखे और उन का पालन करें
- (ग) भारत के प्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करे
- (घ) देश की रक्षा करे और आव्हान किये जाने पर राष्ट्र की सेवा करे
- (ड़) भारत के सभी लोगो में समरसता और समानता भ्रान्तत्व की भावना का निर्माण करे जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग पर आधारित सभी भेदभाव से परे हो, ऐसी प्रथाओं का त्याग करे जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध है
- (च) हमारी सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझे और उस का परिक्षण करे
- (छ) प्राकृतिक पर्यावरण की, जिस के अंतर्गत वन, झील नदी और वन्य जीव है, रक्षा करे और उस का संवर्धन करे तथा प्राणी मात्र के प्रति दयाभाव रखे
- (ज) वैज्ञानिक दृश्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करे
- (झ) सार्वजानिक संपत्ति को सुरक्षित रखे और हिंसा से दूर रहे
- (ञ) वियक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रो में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करे जिस के राष्ट्र निरंतर बढ़ते हुए प्रयत्न और उपलब्धि की नई ऊंचाइयों को छू ले
- (ट) यदि माता-पिता या संरक्षक है, छह वर्ष से चौदह वर्ष तक की आयु वाले अपने, यथास्तिथि, बालक या प्रतिपाल्य के लिए शिक्षा का अवसर प्रदान करे।
संविधान की अनुसूचियाँ
- भाग (क) : राष्ट्रपति और राज्यपाल के वेतन और भत्ते।
- भाग (ख) : लोकसभा तथा विधानसभा के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, राज्यसभा और विधान परिषद् के सभापति तथा उपसभापति के वेतन-भत्ते।
- भाग (ग) : उच्चतम न्यायालय के न्यायधीशों के वेतन-भत्ते।
- भाग (घ) : भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक के वेतन-भत्ते।
महत्वपूर्ण अनुच्छेद
- अनुच्छेद 1 : भारत राज्यों का संघ होगा।
- अनुच्छेद 2 : नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना।
- अनुच्छेद 3 : राज्यों का निर्माण तथा सीमाओं या नामों में परिवर्तन।
- अनुच्छेद 4 : पहली अनुसूची व चौथी अनुसूची के संशोधन तथा दो और तीन के अधीन बनाई गई विधियां .
- अनुच्छेद 5 : संविधान के प्रारम्भ पर नागरिकता।
- अनच्छेद 6 : भारत आने वाले नागरिको को नागरिकता।
- अनुच्छेद 7 : पाकिस्तान जाने वालों को नागरिकता।
- अनुच्छेद 8 : बाहर रहने वाले व्यक्तियों को नागरिकता।
- अनुच्छेद 9 : विदेशी राज्यों की नागरिकता लेने पर नागरिकता का न बने रहना।
- अनुच्छेद 10 : नागरिकता के अधिकारों का बना रहना।
- अनुच्छेद 11 : संसद द्वारा नागरिकता के लिए कानून का विनियमन।
- अनुच्छेद 12 : राज्य की परिभाषा।
- अनुच्छेद 13 : मूल अधिकारों को असंगत या अल्पीकरण करने वाली विधियां।
- अनुच्छेद 14 : विधि के समक्ष समानता।
- अनुच्छेद 15 : धर्म, मूल वंश, जाति, लिंग, या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव पर रोक।
- अनुच्छेद 16 : लोक नियोजन में अवसर की समानता।
- अनुच्छेद 17 : अस्पर्शयता का अंत।
- अनुच्छेद 18 : उपाधियों का अंत।
- अनुच्छेद 19 : अभिव्यक्ति की स्वतंत्र।
- अनुच्छेद 20 : अपराधों के दोष सिद्ध के सम्बन्ध में संरक्षण।
- अनुच्छेद 21 : प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण।
- अनुच्छेद 21 A : 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अधिकार, निजता का अधिकार भी अनुच्छेद 21 के अंतर्गत ही आता है।
- अनुच्छेद 22 : कुछ दशाओं में गिरफ़्तारी से संरक्षण।
- अनुच्छेद 23 : मानव के दुर्व्यापार, बेगारी एवं श्रम पर प्रतिबन्ध।
- अनुच्छेद 24 : 14 वर्ष से काम आयु के बच्चों को कारखानों, खान या किसी खरतनाक उधोग में कार्य नहीं कराया जा सकता है।
- अनुच्छेद 25 : धर्म का आचरण और प्रचार की स्वतंत्रा।
- अनुच्छेद 26 : धार्मिक कार्यो के प्रबंध की स्वतंत्रा।
- अनुच्छेद 29 : अल्पसंख्यक वर्गों के हितो का संरक्षण।
- अनुच्छेद 30 : शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशसन करने का अल्पसंख्यक वर्गों का साधिकार।
- अनुच्छेद 32 : संवैधानिक उपचारों का अधिकार।
- अनुच्छेद 39 A : सभी के लिए सामान न्याय एवं निःशुल्क कानूनी सहायता की व्यवस्था राज्य सरकार करेगी।
- अनुच्छेद 40 : ग्राम पंचायतो का संघठन।
- अनुच्छेद 44 : सामान नागरिक सहिंता।
- अनुच्छेद 48 : कृषि और पशुपालन संगठन।
- अनुच्छेद 48 A : पर्यावरण वन तथा वन्य जीवों की रक्षा।
- अनुच्छेद 49 : राष्ट्रीय स्मारक स्थानों और वस्तुओं का संरक्षण।
- अनुच्छेद 50 : कार्यपालिका से न्यायपालिका का पृथीकरण।
- अनुच्छेद 51 : अंतरास्ट्रीय शांति और सुरक्षा।
- अनुच्छेद 51 A : मूल कर्तव्य।
- अनुच्छेद 52 : भारत का राष्ट्रपति।
- अनुच्छेद 53 : संघ की कार्यपालिका शक्ति।
- अनुच्छेद 54 : राष्ट्रपति का निर्वाचन।
- अनुच्छेद 55 : राष्ट्रपति के निर्वाचन प्रणाली।
- अनुच्छेद 56 : राष्ट्रपति की पदावधि।
- अनुच्छेद 57 : पुननिर्वाचन के लिए पात्रता।
- अनुच्छेद 58 : राष्ट्रपति निर्वाचित होने के लिए आहर्ताए।
- अनुच्छेद 60 : राष्ट्रपति की शपथ।
- अनुच्छेद 61 : राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया।
- अनुच्छेद 63 : भारत का उपराष्ट्रपति।
- अनुच्छेद 64 : उपराष्ट्रपति का राज्यसभा का पदेन सभापति होना।
- अनुच्छेद 65 : राष्ट्रपति के पद की रिक्ति पर उपराष्ट्रपति के कार्य।
- अनुच्छेद 66 : उपराष्ट्रपति का निर्वाचन।
- अनुच्छेद 67 : उपराष्ट्रपति की पदावधि।
- अनुच्छेद 68 : उपराष्ट्रपति के पद की रिक्ति पद भरने के लिए निर्वाचन।
- अनुच्छेद 69 : उपराष्ट्रपति द्वारा शपथ।
- अनुच्छेद 70 : अन्य आकस्मिकता में राष्ट्रपति के कर्तव्यों का निर्वहन।
- अनुच्छेद 71 : राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के निर्वाचन सम्बंधित विषय।
- अनुच्छेद 72 : क्षमादान की शक्ति।
- अनुच्छेद 73 : संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार।
- अनुच्छेद 74 : राष्ट्रपति को सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद।
- अनुच्छेद 75 : मंत्रिओं के बारे में उपबंध।
- अनच्छेद 76 : भारत का महान्यायवादी।
- अनुच्छेद 77 : भारत सरकार के कार्य का संचालन।
- अनुच्छेद 78 : राष्ट्रपति को जानकारी देने के प्रधानमंत्री के कर्त्तव्य।
- अनुच्छेद 79 : संसद का गठन।
- अनुच्छेद 80 : राज्य सभा की संरचना।
- अनुच्छेद 81 : लोकसभा की संरचना।
- अनुच्छेद 83 : संसद के सदनों की अवधि।
- अनुच्छेद 84 : संसद का सत्र सत्रावसान और विघटन।
- अनुच्छेद 87 : राष्ट्रपति का विशेष अभी भाषण।



Comments